गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में डीएम सख्त, जांच समिति गठित

गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में डीएम सख्त, जांच समिति गठित

चिकित्सकीय अभिलेखों की होगी गहन जांच, रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा मौत का कारण और समय।

चंपावत। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के प्रकरण का जिलाधिकारी मनीष कुमार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। डीएम के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई है, जो उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की विस्तृत जांच करेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान के अनुसार 22 वर्षीय प्रियंका ने 18 अगस्त को उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श लिया था। महिला ने बताया था कि करीब दो दिनों से उसे गर्भस्थ शिशु की हलचल महसूस नहीं हो रही थी।

12 अगस्त की रिपोर्ट में शिशु जीवित, 18 अगस्त को नहीं मिली कार्डियक एक्टिविटी

सीएमओ ने बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 12 अगस्त की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु जीवित पाया गया था। रिपोर्ट में शिशु की हृदय गति 135 प्रति मिनट दर्ज थी और फीटल मूवमेंट्स एवं कार्डियक मूवमेंट्स मौजूद होने का उल्लेख था। गर्भावस्था की अवधि करीब 34 सप्ताह बताई गई थी। वहीं, 18 अगस्त की निजी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की कार्डियक एक्टिविटी अनुपस्थित पाई गई और रिपोर्ट में फीटल डिमाइस का उल्लेख किया गया है। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि दोनों रिपोर्टों से 12 अगस्त को शिशु के जीवित होने और 18 अगस्त को फीटल डिमाइस पाए जाने की पुष्टि होती है। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि शिशु की मृत्यु दो सप्ताह पहले ही हो गई थी।

जांच के बाद ही सामने आएगा वास्तविक कारण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केवल दो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर गर्भस्थ शिशु की मृत्यु का वास्तविक समय और कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड, महिला की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यक अन्य जांचों का विस्तृत परीक्षण जरूरी है। डीएम मनीष कुमार ने कहा कि मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। जांच समिति सभी तथ्यों और चिकित्सकीय अभिलेखों का निष्पक्ष परीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सीएमओ ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति अथवा चिकित्सकीय संस्थान के संबंध में निष्कर्ष निकालने से बचें। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।