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श्यामपुर-लालढांग में सड़कों पर घूमते झुंड से बढ़ी परेशानी, चंडीघाट से चिड़ियापुर बॉर्डर तक रात में हादसे का खतरा
सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग! दूध की बाल्टी भर जाए तो पशुधन घर का, दूध उतर जाए तो सड़क का। फिर वही पशुधन गांव की गलियों से लेकर हाईवे तक घूमता नजर आए तो सवाल सिर्फ राहगीरों की मुश्किल का नहीं, जिम्मेदारी से दूर भागने वालों का भी है। श्यामपुर-लालढांग क्षेत्र में यही तस्वीर अब लोगों के लिए परेशानी और खतरे का सबब बनती जा रही है। गांव की गलियों में झुंड रास्ता रोक रहे हैं तो चंडीघाट से चिड़ियापुर बॉर्डर तक हाईवे पर अचानक सामने आ जाने वाला पशुधन वाहन चालकों के लिए आफत बन रहा है।

अक्सर देखने में आता है कि कई लोग पशुधन को तब तक घर में रखते हैं, जब तक उससे दूध मिलता है। दूध देना कम या बंद हुआ तो उसे खुला छोड़ दिया जाता है। कुछ लोग शाम को दूध निकालने के बाद भी पशुधन को सड़कों पर छोड़ देते हैं। देखते ही देखते यही झुंड गांव की गलियों, संपर्क मार्गों और हाईवे पर घूमता नजर आता है। गांव की गलियों में इनका सबसे ज्यादा सामना बच्चों और बुजुर्गों से होता है। कई बार झुंड अचानक बिदककर लोगों की ओर दौड़ पड़ता है।
यही स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब सड़क पर घूमता पशुधन किसी राहगीर को चोट पहुंचा दे या वाहन से टकरा जाए। नुकसान होने के बाद कई बार संबंधित पालक पशुधन अपना होने से ही इनकार कर देते हैं। इससे विवाद की स्थिति बनती है और बात तकरार तक पहुंच जाती है। सवाल यह है कि जब पशुधन किसी घर में पाला जा रहा है तो उसके सड़क पर पहुंचने के बाद जिम्मेदारी किसकी होगी?
सूत्रों के मुताबिक पशुधन की पहचान के लिए विभाग पहले ही सर्वे कर कान में टैग लगा चुका है। टैग पर दर्ज नंबर से उसके पालक की पहचान की जा सकती है। इसके बावजूद खुले में घूमते पशुधन को लेकर जवाबदेही तय नहीं हो पाना सवाल बना हुआ है।
जिम्मेदारी का यह सवाल चंडीघाट से चिड़ियापुर बॉर्डर तक हाईवे पर और गंभीर हो जाता है। यहां कई जगह पशुधन के झुंड दिखाई देते हैं। सड़क पर बैठे या घूमते पशुधन के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना या दिशा बदलना पड़ता है। इनकी वजह से पहले भी दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रात में काले रंग का पशुधन अंधेरे में दूर से दिखाई नहीं देता। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक अचानक सामने आए पशुधन से टकरा सकते हैं या उसे बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर गिर सकते हैं। तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर में पशुधन के साथ वाहन सवारों की जान पर भी बन सकती है।

पशुधन के लिए योजनाएं और व्यवस्थाएं होने के बावजूद अगर वह गांव की गलियों से हाईवे तक भटकता नजर आए तो यह तस्वीर आखिर किस ओर इशारा करती है।

