हरिद्वार में नशे की खेपों की लगातार आमद, आखिर माजरा क्या है?
देवभूमि में नशीले पदार्थों की आमद और बढ़ती पहुंच को लेकर मंथन की दरकार
सूर्या संदेश !
हरिद्वार में नशे की खेप पकड़े जाने की खबर अब कोई नई बात नहीं रही। सूचना मिलती है, पुलिस कार्रवाई करती है, आरोपी पकड़े जाते हैं और नशीला पदार्थ बरामद हो जाता है। मगर क्या बात यहीं खत्म हो जाती है? 20 से 23 सितंबर के महज चार दिनों की घटनाओं को सिलसिलेवार देखें तो एक सवाल अनायास सामने आता है,आखिर नशे की ये खेपें आती कहां से हैं और अलग-अलग इलाकों तक पहुंचती कैसे हैं?
20 सितंबर को पथरी के ऐथल में 216 ट्रामाडोल युक्त कैप्सूल और 350 अल्प्राजोलम गोलियां, कुल 566 नशीली दवाएं बरामद हुईं। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने ये दवाएं लक्सर के बसेड़ी स्थित मेडिकल स्टोर से खरीदने की बात कही। इसी दिन लंढौरा क्षेत्र में 4.45 ग्राम स्मैक भी पकड़ी गई।
22 सितंबर को पिरान कलियर में 4.74 ग्राम स्मैक और ज्वालापुर में 55 ट्रामाडोल कैप्सूल व 40 अल्प्राजोलम टैबलेट बरामद हुए। 23 सितंबर को लक्सर में 20 लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई।
इन चार दिनों की घटनाओं से पूरे जिले में नशे की स्थिति पर कोई बड़ा निष्कर्ष निकालना मुनासिब नहीं होगा। मगर अलग-अलग इलाकों और अलग-अलग किस्म के नशीले पदार्थों से जुड़ी ये कार्रवाइयां उस आमद और पहुंच पर गौर की वजह जरूर देती हैं, जो बरामदगी की खबर के पीछे छूट जाती है।
9 नवंबर को उत्तराखंड गठन के 26 बरस पूरे करेगा। ऐसे मुकाम पर सवाल सिर्फ यह नहीं कि कितनी खेप पकड़ी गईं, बल्कि यह भी है कि नशीले पदार्थों की आमद के रास्ते और उनकी पहुंच को समझने के लिए तस्वीर का अगला सिरा कहां तलाशा जाए।
हर बरामदगी कार्रवाई की खबर है, लेकिन उसके पीछे का रास्ता भी अनदेखा न रह जाए,मंथन की असल जरूरत शायद यही है!

