हर दिन टूटे रास्ते से गुजरनें को मजबूर लोग , सड़क की मरम्मत अब भी कागजों में… जमीन पर कब?

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बारिश और बाढ़ में बहा था सड़क का हिस्सा, दो महीने बाद भी स्थायी मरम्मत नहीं; स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और कृष्णायन गौशाला तक आने-जाने वालों की बढ़ी परेशानी


सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग। गेंड़ीखाता की गुज्जरबस्ती में करीब पांच हजार लोगों की रोज आवाजाही वाले रास्ते का एक हिस्सा बारिश और बाढ़ में बह गया था। करीब दो महीने बाद भी इसकी स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी है। रास्ता बंद नहीं हुआ, लेकिन टूटे हिस्से से होकर गुजरना लोगों के लिए रोज की परेशानी बन गया है। स्कूली बच्चों और जरूरी काम से निकलने वाले ग्रामीणों को भी दिक्कत उठानी पड़ रही है।


बारिश के दौरान सड़क का कटाव रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सड़क किनारे वायर क्रेट लगाए थे। इससे तत्काल बचाव का इंतजाम हुआ, लेकिन स्थायी मरम्मत नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति को लेकर विभाग को कई बार फोन और लिखित पत्र के जरिए सूचना दी गई, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ।


ग्राम प्रधान बिस्मिल्लाह लोधा के मुताबिक विभाग को लगातार जानकारी देने के बावजूद सड़क की मरम्मत में तेजी नहीं दिखाई गई। नूर भड़ाना,यूसुफ, बाबू बशीर, सफी लोधा और मौ ईशा समेत ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क होने के कारण उनकी समस्या पर शहर जैसी तेजी से ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि शहर में ऐसी स्थिति होती तो शायद मरम्मत के लिए इतना इंतजार नहीं करना पड़ता।


ग्रामीणों के मुताबिक इसी मार्ग से कृष्णायन गौशाला तक भी आवागमन होता है। ऐसे में टूटे रास्ते की परेशानी केवल बस्ती तक सीमित नहीं है। बारिश में सड़क क्षतिग्रस्त होने के बाद से ग्रामीण मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं।


लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क का कटाव रोकने के लिए तत्काल वायर क्रेट लगाए गए थे। सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।


फिलहाल करीब पांच हजार लोगों की रोज की आवाजाही वाले इस रास्ते का क्षतिग्रस्त हिस्सा दो महीने बाद भी मरम्मत का इंतजार कर रहा है। ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि सड़क पर काम कब शुरू होता है।

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