रवासन में खनन का खेल, मजदूरों से चुगान पर अनुमति का पेंच
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सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग। रवासन नदी में वन विकास निगम के तहत मजदूरों से चुगान कराने की अनुमति अब तक नहीं मिल पाई है, जबकि इसी नदी में निगम के चुगान क्षेत्र के आसपास खनन पट्टों पर मशीनों से खनन जारी है। एक तरफ मजदूरों के चुगान की अनुमति अटकी है, तो दूसरी तरफ मशीनों से खनन हो रहा है। इस स्थिति ने अनुमति की प्रक्रिया और खनन की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच एक पट्टे पर दो पोकलेन मशीनें चलने का मामला भी सामने आया है। जिला खनन अधिकारी अमित गौरव के अनुसार, एक पट्टे पर एक ही पोकलेन मशीन के इस्तेमाल का नियम है। ऐसे में एक ही पट्टे पर दो मशीनों का संचालन किस आधार पर हो रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, 15 अक्टूबर को रवासन नदी से करीब 80 वाहन खनन सामग्री लेकर निकले, जबकि 16 अक्टूबर को यह संख्या करीब 250 रही। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ये नदी से खनन सामग्री की बड़े पैमाने पर निकासी की ओर इशारा करते हैं।
नदी का तल लगातार गहरा होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खनन और समतलीकरण के काम की स्वीकृत सीमा तथा सर्वे रिपोर्ट का मिलान जरूरी है। वहीं, खनन सामग्री लेकर निकलने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग की शिकायतों की पुष्टि के लिए भी जांच आवश्यक है।
एक तरफ वन विकास निगम के तहत मजदूरों से चुगान की अनुमति अब तक नहीं मिल पाई है, तो दूसरी तरफ नदी में मशीनों से बड़े पैमाने पर खनन जारी है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों के बीच भी चर्चाएं तेज हैं। क्षेत्र में खनन कार्य का पूर्व में भी विरोध होता रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने और आसपास की कृषि भूमि पर मंडराते खतरे के बीच इस पूरे मामले पर सवाल उठना लाजिमी है।

