दीपावली के दीये बनेंगे ग्रामीण परिवारों की कमाई का जरिया
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सूर्या संदेश
हरिद्वार! दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीये इस बार ग्रामीण महिलाओं और युवाओं की कमाई का जरिया भी बन सकते हैं। पारंपरिक माटीकला को रोजगार से जोड़ने के लिए माटीकला बोर्ड रुड़की प्रशिक्षण से लेकर स्वरोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर ग्राम्य विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और रीप परियोजना के सहयोग से अब तक 50 लोगों को मिट्टी के दीये और आकर्षक मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

माटीकला बोर्ड के उपाध्यक्ष शोभाराम प्रजापति ने बताया कि हर दो माह में 25 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षित महिलाओं और युवाओं को अपना काम शुरू करने के लिए दीये बनाने वाली मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों के अनुरूप इस पहल के तहत तैयार उत्पादों की पैकेजिंग और बाजार में पहचान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने लोगों से दीपावली पर स्थानीय कारीगरों के बनाए मिट्टी के दीये और मूर्तियां खरीदने की अपील की है। इससे स्थानीय कारीगरों को काम मिलने के साथ पारंपरिक माटीकला को भी बढ़ावा मिलेगा।
