दवा-इलाज की उम्मीद में बनी इमारत, अस्पताल में अब तक नहीं गूंजी इलाज की आहट
श्यामपुर पीएचसी का भवन करीब तीन साल से तैयार, डॉक्टरों की तैनाती नहीं होने से इलाज शुरू नहीं; कई बार जल्द स्वास्थ्य सेवा शुरू करने का आश्वासन, धरातल पर अब भी इंतजार
सूर्या संदेश समाचार
श्यामपुर,(हरिद्वार)। दवा-इलाज की उम्मीद में बनी इमारत करीब तीन साल से खड़ी है, लेकिन यहां अब तक मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो सका। श्यामपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तैयार होने के बावजूद डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई। नतीजा यह है कि बीमारी या जरूरत के समय आसपास के लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ रहा है। तैयार भवन में स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं होना अब सिर्फ देरी का मामला नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भवन से लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें पास में ही इलाज मिल सकेगा। लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण आज भी लोगों को करीब 15 से 25 किलोमीटर दूर हरिद्वार या ऋषिकेश जाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों के लोगों को नजीबाबाद और बिजनौर तक जाना पड़ने की स्थिति भी बनती है।
किसी की अचानक तबीयत बिगड़ जाए, गर्भवती महिला को तुरंत इलाज की जरूरत हो या सड़क पर हादसा हो जाए, ऐसे समय में सबसे पहले पास के अस्पताल की जरूरत पड़ती है। श्यामपुर में अस्पताल की इमारत तैयार होने के बावजूद इलाज की सुविधा नहीं मिलना इसी परेशानी को और बढ़ा रहा है। यही वजह है कि लोगों के लिए यह भवन सिर्फ बंद पड़ी इमारत नहीं, बल्कि लंबे समय से पूरी नहीं हुई एक जरूरी उम्मीद बन गया है।
इस बीच स्वास्थ्य केंद्र जल्द शुरू करने के आश्वासन भी मिलते रहे, लेकिन धरातल पर स्थिति अब तक नहीं बदली। इमारत तैयार है, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भवन बनकर तैयार हो चुका है तो लोगों के इलाज के लिए इसे शुरू करने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है।
श्यामपुर से चंडीघाट होते हुए चिड़ियापुर बॉर्डर तक का इलाका दूर-दराज के क्षेत्रों से जुड़ा है। यहां नजदीकी स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत को इस बात से भी समझा जा सकता है कि लालढांग के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी डॉक्टरों की पूरी तैनाती नहीं होने की समस्या बताई जाती है। ऐसे में श्यामपुर का पहले से तैयार स्वास्थ्य केंद्र शुरू नहीं होना आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
अस्पताल शुरू होने से पहले ही भवन की देखरेख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परिसर की चारदीवारी क्षतिग्रस्त होने लगी है और वहां बने चैंबरों के ढक्कन तक चोरी हो चुके हैं। लोगों के मुताबिक जिस भवन में मरीजों का इलाज होना था, वह लंबे समय से बंद है और समय बीतने के साथ उसकी हालत भी प्रभावित हो रही है। यानी इलाज शुरू होने का इंतजार कर रहा भवन अब अपनी देखरेख को लेकर भी सवाल खड़े करने लगा है।
करीब तीन साल से खड़ी यह इमारत अब किसी निर्माण या नई योजना का इंतजार नहीं कर रही। भवन बन चुका है, पैसा खर्च हो चुका है और परिसर की देखरेख भी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में सवाल इलाज शुरू होने का नहीं, बल्कि यह है कि तैयार स्वास्थ्य केंद्र को चलाने के लिए व्यवस्था को आखिर और कितना वक्त चाहिए।
जिस भवन में लोगों को बीमारी के समय सहारा मिलना था, वहां आज भी इलाज शुरू होने का इंतजार है। यानी इमारत ने अपना काम पूरा कर दिया, लेकिन व्यवस्था की बारी अब तक नहीं आई।

