एआई लोकतंत्र को मजबूत करे, मानव विवेक का विकल्प न बने : राज्यपाल

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देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ अंतरराष्ट्रीय समिट


सूर्या संदेश समाचार
हरिद्वार। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग जनहित, सुशासन और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होना चाहिए। एआई निर्णय लेने में सहायता कर सकती है, लेकिन मानव विवेक और जिम्मेदारी का विकल्प नहीं बन सकती। वह मंगलवार को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ अंतरराष्ट्रीय समिट के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि एआई का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में इसके उपयोग से दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा सकती है। उत्तराखंड में एआई का उपयोग आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि-बागवानी, पर्यावरण संरक्षण, चारधाम यात्रा और भीड़ प्रबंधन में किया जा सकता है। एआई में पक्षपात सामाजिक असमानता बढ़ा सकता है, इसलिए तकनीक में पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है।


मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई जरूरी : डॉ. चिन्मय पण्ड्या
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाना होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वीडियो संदेश में कहा कि एआई का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए होना चाहिए। लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष डेक्स हंटर टोरिक ने एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने पर जोर दिया।

समिट में एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति और नागरिक भागीदारी पर चर्चा हुई। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया और एआई आधारित पत्रिका सहित कई पुस्तकों का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, डॉ. विजय धस्माना, मनु गौड़ सहित देश-विदेश के विशेषज्ञ शामिल हुए!

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