झूला पुल के लिए सड़कों पर उतरा जनसैलाब, गांधी चौक से मीठी बेरी तक निकली जन आक्रोश रैली

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रसूलपुर में 23वें दिन भी धरना और क्रमिक अनशन जारी


सूर्या संदेश

श्यामपुर/लालढांग!रसूलपुर में झूला पुल निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के 23वें दिन रविवार को जन आक्रोश रैली के रूप में लोग सड़कों पर उतरे। गांधी चौक से शुरू हुई रैली लालढांग होते हुए मीठी बेरी चौराहे तक पहुंची। हाथों में बैनर और अलग-अलग तख्तियां लिए लोग पुल निर्माण की मांग से जुड़े नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।


इस दौरान झूला पुल निर्माण संघर्ष समिति के बैनर लगी भैंसा बुग्गियों पर बैठे क्रमिक अनशनकारी भी रैली का हिस्सा रहे । कुछ लोग हाथों में बैनर लेकर आगे-आगे नारेबाजी करते हुए चलते नजर आए, जबकि अन्य लोग उनके पीछे आगे बढ़ते रहे। मौजूदा धरने के दौरान इससे पहले भी एक रैली हो चुकी है। रविवार को धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दोबारा सड़क पर उतरकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया।


रसूलपुर में झूला पुल निर्माण को लेकर धरना 23वें दिन भी जारी है। इसी स्थल पर क्रमिक अनशन भी चल रहा है। धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि मांग पर कोई ठोस कार्रवाई या पहल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह है कि इस दबाव के बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।

रसूलपुर में झूला पुल निर्माण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के 23वें दिन रविवार को जन आक्रोश रैली के रूप में लोग सड़कों पर उतरे। गांधी चौक से शुरू हुई रैली लालढांग होते हुए मीठी बेरी तिराहे तक पहुंची। हाथों में बैनर और अलग-अलग तख्तियां लिए लोग पुल निर्माण की मांग से जुड़े नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।


इस दौरान झूला पुल निर्माण संघर्ष समिति के बैनर लगी भैंसा बुग्गियां भी रैली का हिस्सा रहीं। कुछ लोग हाथों में बैनर लेकर आगे-आगे नारेबाजी करते हुए चलते नजर आए, जबकि अन्य लोग उनके पीछे आगे बढ़ते रहे। मौजूदा धरने के दौरान इससे पहले भी एक रैली हो चुकी है। रविवार को धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दोबारा सड़क पर उतरकर अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया।

भैंसा बुग्गी पर सवार क्रमिक अनशनकारी


रसूलपुर में झूला पुल निर्माण को लेकर धरना 23वें दिन भी जारी है। इसी स्थल पर क्रमिक अनशन भी चल रहा है। धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि मांग पर कोई ठोस कार्रवाई या पहल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह है कि इस दबाव के बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।

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