नलोवाला में हाईवे पर टर्निंग कट नहीं, लंबा चक्कर बचाने में जान का जोखिम
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गांव पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ते का अभाव, रॉन्ग साइड चलने या हाईवे पार करने की मजबूरी के बीच बढ़ी चिंता
सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग! गांव तक पहुंचने के लिए महज कुछ मिनट बचाने की कोशिश नलोवाला के ग्रामीणों को हर दिन जोखिम के सामने खड़ा कर रही है। हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर गांव के लिए सुरक्षित टर्निंग कट नहीं होने से लोगों को लंबा चक्कर काटकर पहुंचना पड़ता है। इस अतिरिक्त दूरी से बचने के लिए कुछ लोग रॉन्ग साइड चलने का जोखिम उठाते हैं, जबकि पैदल राहगीरों और दोपहिया सवारों के सामने कई बार हाईवे पार करने की मजबूरी भी आती है। सुबह और शाम वाहनों की तेज आवाजाही के बीच यह स्थिति कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
नलोवाला के युसूफ गुर्जर, नजाकत अली, अकरम, मुमताज अली, फैज अहमद, खुर्शीद भढ़ाना और जाकिर के अनुसार, गांव में आने-जाने के लिए हाईवे पर सुरक्षित टर्निंग प्वाइंट नहीं होने का असर रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ रहा है। गांव पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करने से समय के साथ ईंधन का खर्च भी बढ़ रहा है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए यह परेशानी लगातार बनी हुई है।

ग्रामीणों के मुताबिक, अतिरिक्त दूरी से बचने के लिए कुछ लोग हाईवे पर रॉन्ग साइड निकल जाते हैं। पैदल राहगीरों और दोपहिया सवारों को कई बार हाईवे पार करके दूसरी ओर जाना पड़ता है। यह जोखिम उस समय और बढ़ जाता है, जब हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है।
सुबह और शाम के समय हाईवे पर भारी वाहनों की तेज आवाजाही के बीच स्कूली बच्चों, किसानों, दुग्ध विक्रेताओं और कामकाजी लोगों का भी आवागमन होता है। ऐसे में सुरक्षित टर्निंग कट का अभाव केवल अतिरिक्त दूरी की परेशानी नहीं रह जाता, बल्कि सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन जाता है।
हर दिन इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों के सामने सवाल यही है कि गांव तक पहुंचने के लिए उन्हें आखिर कब तक लंबा चक्कर काटना पड़ेगा? क्या अतिरिक्त दूरी से बचने के लिए रॉन्ग साइड चलना या व्यस्त हाईवे पार करना ही एकमात्र रास्ता रहेगा? यदि सुरक्षित टर्निंग कट की व्यवस्था संभव है तो नलोवाला के लोगों को इसके लिए और कितना इंतजार करना होगा, यह सवाल अब जिम्मेदार व्यवस्था के सामने है।

