लालढांग में अधिकारियों की बढ़ी हलचल का खुला राज, रेंज के स्टोर से हाथी दांत गायब

laldhang-range-store-hathi-dant-chori.jpg

रेंजर समेत तीन अधिकारियों को नोटिस, एसआईटी कर रही मामले की जांच

सूर्या संदेश

श्यामपुर/लालढांग। लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाली लालढांग वन रेंज में पिछले कुछ समय से अधिकारियों की बढ़ी आवाजाही के पीछे की वजह अब सामने आई है। रेंज के सुरक्षित स्टोर में रखे हाथी दांतों के गायब होने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में जांच तेज हो गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्टोर में रखे हाथी दांतों की संख्या और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का मिलान करने पर पांच दांत गायब मिले हैं। इनका कुल वजन करीब 35 किलो बताया जा रहा है। वहीं, स्टोर में मौजूद शेष दस हाथी दांतों के वजन में भी दस्तावेजों में दर्ज वजन से अंतर मिला है। कुछ दांतों का वजन पहले दर्ज वजन से कम पाया गया है। इनके कुछ हिस्से काटे या निकाले जाने की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।


बताया गया कि 31 अक्टूबर को स्टोर में रखे हाथी दांतों और उनसे जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया गया था। इसी दौरान पांच हाथी दांतों का हिसाब नहीं मिला। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने स्टोर से जुड़े दस्तावेजों और वहां रखी सामग्री की जांच शुरू की।


हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने मामले में कोटद्वार के एसडीओ, लालढांग के रेंजर और स्टोर प्रभारी को नोटिस जारी किए हैं। रेंजर के मेडिकल अवकाश पर जाने की भी जानकारी है।


मामले में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत एच-2 केस दर्ज किया गया है। यमकेश्वर में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद इसे कोटद्वार पुलिस को भेज दिया गया है।


शिवालिक के वन संरक्षक राजीव धीमान के निर्देश पर हरिद्वार के डीएफओ की अगुवाई में विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई गई है। टीम को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच के तहत एसडीओ, रेंजर और स्टोर के पूर्व व वर्तमान प्रभारियों समेत पांच लोगों के बयान लिए गए हैं।


जांच टीम स्टोर की चाबियों, सीसीटीवी फुटेज, स्टोर को पहले दूसरी जगह ले जाने से जुड़े दस्तावेजों और पुराने स्टॉक की जांच से संबंधित कागजात की पड़ताल कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हाथी दांतों की आखिरी बार गिनती और वजन कब किया गया था।


बताया जा रहा है कि ये हाथी दांत वर्ष 2005-06 के दौरान स्टोर में रखे गए थे। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हाथी दांत कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति साफ हो सकेगी।