रसूलपुर पुल आंदोलन, पांच दशक पुरानी मांग पर अब भी इंतजार, पुल निर्माण शुरू होने तक डटे रहने का ग्रामीणों ने लिया संकल्प
सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग!एक पुल की मांग कितनी पुरानी हो सकती है? रसूलपुर-आर्यनगर के ग्रामीणों के लिए इसका जवाब पांच दशक से भी लंबा है। वर्ष 1970 से रवासन नदी पर पुल की मांग कर रहे ग्रामीण आज भी इसके निर्माण का इंतजार कर रहे हैं।
छात्र आर्यन भट्ट की रवासन नदी में डूबकर मौत के बाद यह मांग फिर जोर पकड़ गई और आंदोलन ने जनआंदोलन का रूप ले लिया। पुल निर्माण की मांग को लेकर शुरू हुआ धरना गुरुवार को छठे दिन भी जारी रहा। ग्रामीण जल्द निर्माण शुरू कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
आमतौर पर अलग-अलग मंचों और विचारों से उठने वाली आवाजें अलग होती हैं, लेकिन रसूलपुर के झूला पुल का मुद्दा ऐसा है, जहां ये आवाजें अब एक ही मांग पर आकर मिल गई हैं—पुल का निर्माण।

अब इस मांग की गूंज गांव से बाहर भी सुनाई देने लगी है। प्रशासन की ओर से हल्के वाहनों के लिए स्टील गार्डर पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्ताव और आश्वासन से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका सीधा कहना है कि जब तक पुल निर्माण का काम शुरू नहीं होता, वे धरने से नहीं उठेंगे।

