स्कूल की राह में गड्ढे इतने कि गूल की दीवार बनी सहारा
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सूर्या संदेश, श्यामपुर ! कंधे पर बस्ता, हाथ में पानी की बोतल और सामने स्कूल की राह… लेकिन रास्ते में आते ही बच्चों को संभलकर कदम बढ़ाने पड़ते हैं। सड़क के गहरे गड्ढों में भरे कीचड़ और गंदे पानी से बचने के लिए स्कूली बच्चे गूल की पतली दीवार का सहारा लेकर आगे बढ़ते हैं।
श्यामपुर में स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह कोई चुना हुआ रास्ता नहीं, बल्कि सड़क की खराब स्थिति के बीच निकलने की मजबूरी है।

गांव से हाईवे की ओर जाने वाली सड़क का ज्यादातर हिस्सा ठीक-ठाक नजर आता है। लेकिन विद्यालय से करीब 200 मीटर पहले पहुंचते ही सड़क की तस्वीर बदल जाती है। इस हिस्से में जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं। बारिश होने पर इनमें पानी और कीचड़ भर जाता है, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।

श्यामपुर रामलीला मैदान के बराबर से श्रीराम आश्रम की ओर जाने वाला यह रास्ता आगे हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे से जुड़ता है। रोज इसी रास्ते से स्कूली बच्चों के साथ दूसरे लोग भी आते-जाते हैं। सड़क पर गड्ढों और कीचड़-पानी के कारण बच्चों को गूल की संकरी दीवार पर संतुलन बनाकर निकलना पड़ता है।
कंधे पर बस्ता और हाथ में पानी की बोतल लिए बच्चों के लिए इस पतली दीवार पर चलना आसान नहीं है। जरा सा पैर फिसलने पर नीचे कीचड़ और गंदे पानी में गिरने का डर बना रहता है। बारिश के दिनों में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाने वाले अभिभावकों को भी इस हिस्से से गुजरने में दिक्कत होती है। दोपहिया वाहन से निकलते समय पानी के नीचे छिपे गड्ढे और कीचड़ परेशानी बढ़ाते हैं। सड़क का अधिकांश हिस्सा ठीक होने के बावजूद करीब 200 मीटर का यह टुकड़ा रोज स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सबसे मुश्किल पड़ाव बना हुआ है।
जिस राह पर बच्चों के कदम स्कूल की ओर बढ़ने चाहिए, वहां गड्ढों से बचने के लिए गूल की पतली दीवार का सहारा लेना पड़ रहा है। तस्वीर अपने आप सवाल खड़ा करती है कि स्कूल तक पहुंचने वाली इस राह को आखिर कब बच्चों के लिए आसान बनाया जाएगा?

