कुंभ की पेशवाई में हाथी-रथों का होगा भव्य नजारा, हर कदम पर दिखेगी खास तैयारी
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निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के रास्ते पर उतरे अधिकारी, गोविंदपुरी से छावनी तक सड़क, पेड़ और बिजली की लाइनों का जायजा
सूर्या संदेश
हरिद्वार। कुंभ की पेशवाई में आस्था, परंपरा और भव्यता एक साथ दिखाई देती है। हाथियों, सजे हुए रथों, ध्वजों और झांकियों के साथ साधु-संतों की पेशवाई का अलग ही नजारा होता है। इसी भव्य स्वरूप को ध्यान में रखते हुए कुंभ मेला-2027 की पेशवाई के रास्तों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।बुधवार को मेला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के गोविंदपुरी से छावनी तक पूरे रास्ते का जायजा लिया।
निरंजनी अखाड़े की पेशवाई एसएमजेएन पीजी कॉलेज परिसर, गोविंदपुरी से शुरू होगी। यहां से रानीपुर मोड़, शंकर आश्रम, सिंहद्वार, देशरक्षक तिराहा, बाबा रामदेव पुलिया, झंडा चौक, बंगाली मोड़, शंकराचार्य चौक, तुलसी चौक और वाल्मीकि चौक होते हुए अखाड़े की छावनी तक पहुंचेगी।
रास्ते की सड़क की चौड़ाई, पेड़ों, बिजली की लाइनों, रोशनी और यातायात की स्थिति को देखा गया। हाथियों और ऊंचे रथों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ऊपर और आसपास की जगह भी देखी गई, ताकि पेशवाई के दौरान आवाजाही सुचारु और सुरक्षित रहे। यही वजह है कि इस बार पेशवाई के रास्ते की तैयारियों में केवल सड़क ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अखाड़े के सचिव राम रतन गिरी ने कहा कि पेशवाई कुंभ की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इसमें साधु-संतों के साथ हाथी, रथ, ध्वज और झांकियां शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि पेशवाई की भव्यता के अनुरूप श्रद्धालुओं और संतों के लिए सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। कुंभ को सफल और गरिमापूर्ण बनाने में अखाड़ों की ओर से प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह गिल ने संबंधित विभागों को पेशवाई के रास्ते और छावनी से जुड़े जरूरी काम समय से पूरा करने को कहा। उन्होंने यातायात, सुरक्षा, आग से बचाव, सफाई, पानी, बिजली और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश दिए।
इस दौरान पुलिस, फायर सर्विस, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, यूपीसीएल, जल संस्थान और नगर निगम समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

