लालढांग : चार साल बाद भी सड़क-बिजली की सुविधाओं का इंतजार, सोलर पैनल के सहारे चल रहा रसूलपुर मीठी बेरी का कॉलेज

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वन क्षेत्र से सटे राजकीय मॉडल महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता, बरसात में बढ़ती है विद्यार्थियों की परेशानी

सूर्या संदेश !
राजकीय मॉडल महाविद्यालय, रसूलपुर मीठी बेरी में स्थापना के चार साल बाद भी पक्की सड़क और नियमित बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। वन क्षेत्र से सटे इस महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए छात्र-छात्राओं को कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ता है। परिसर में बिजली की जरूरतें सोलर पैनल के सहारे पूरी की जा रही हैं, जो महाविद्यालय की आवश्यकताओं के लिहाज से नाकाफी हैं।

मॉडल डिग्री कॉलेज रसूलपुर मीठी बेरी के लिए पहुंचने वाला वन क्षेत्र से गुजरा कच्चा मार्ग


महाविद्यालय के आसपास हाथियों, गुलदारों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही भी देखने को मिलती है। बरसात के दौरान कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाने के कारण विद्यार्थियों को कॉलेज पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे में पक्की सड़क का निर्माण विद्यार्थियों की सुविधा के साथ-साथ क्षेत्र के ग्रामीणों के आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण है।


जिला पंचायत सदस्य बृजमोहन पोखरियाल ने बताया कि वह सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और विभागों को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के हित को प्राथमिकता देते हुए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस दिशा में पहल होनी चाहिए। महाविद्यालय तक सड़क का निर्माण जल्द कराया जाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को आवागमन में राहत मिल सके।


ग्राम प्रधान रसूलपुर मीठी बेरी ने कहा कि महाविद्यालय तक सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उनकी ओर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की स्थापना के समय क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि मॉडल डिग्री कॉलेज में उच्च शिक्षा के बेहतर अवसरों के साथ विभिन्न पाठ्यक्रम भी उपलब्ध होंगे। लेकिन वर्तमान में यहां केवल बीए की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। बीएससी, बीकॉम और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में शैक्षणिक सुविधाओं और पाठ्यक्रमों का विस्तार होना चाहिए, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को इसका पूरा लाभ मिल सके।


ग्राम प्रधान पीली पड़ाव शशि पाल सिंह झंडवाल ने कहा कि उनके क्षेत्र से महाविद्यालय की दूरी करीब चार किलोमीटर है और वहां के छात्र-छात्राओं को वन क्षेत्र से होकर कॉलेज पहुंचना पड़ता है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से महाविद्यालय तक पक्की सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। सड़क बनने से विद्यार्थियों को कॉलेज पहुंचने में सुविधा मिलेगी और आसपास के ग्रामीणों को भी आवागमन का बेहतर साधन उपलब्ध होगा।


ग्रामीण सुभाष सैनी, गौरव ठाकुर, विनोद सैनी और खेमचंद सहित अन्य लोगों का कहना है कि सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर होने से विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। उनका मानना है कि बेहतर आवागमन और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी वृद्धि हो सकती है।


सड़क निर्माण की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। संबंधित अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई।


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