मुश्किलों को मात देकर आत्मनिर्भरता की राह पर भारती रावत, महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मुर्गी पालन से हर चक्र में कमा रहीं 50 से 55 हजार रुपये, सरकारी सहायता से शुरू किया स्वरोजगार
सूर्या संदेश
श्यामपुर/लालढांग। हरिद्वार जिले के चमारिया गांव निवासी भारती रावत ने मुर्गी पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। उनका यह प्रयास उन ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक रूप से मजबूत बनने और परिवार की आय बढ़ाने के लिए रोजगार के अवसर तलाश रही हैं।
भारती के फार्म में एक बार में 2,200 चूजों का पालन किया जाता है। वह अब तक मुर्गी पालन के सात उत्पादन चक्र पूरे कर चुकी हैं और प्रत्येक चक्र से करीब 50 से 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। चूजों को बिक्री के लिए तैयार करने में लगभग 40 से 45 दिन का समय लगता है।
भारती ने वर्ष 2025 में उत्तराखंड सरकार की ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना (रीप) के तहत मिली 75 हजार रुपये की सब्सिडी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के अंतर्गत सहकारी बैंक से प्राप्त 1.60 लाख रुपये के ब्याजमुक्त ऋण की मदद से यह व्यवसाय शुरू किया। सरकारी सहायता और ऋण के सहारे शुरू हुआ उनका यह उद्यम आज परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रहा है।
भारती रावत की पहल बताती है कि उचित मार्गदर्शन, उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ और स्वरोजगार के प्रति प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर खोल सकते हैं।
